विधायक सरयू राय के निशाने पर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, विधायक के पुस्तक मैनहर्ट नियुक्ति घोटाले से प्रेरित "लम्हों के खता" का विमोचन, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने दिया जवाब...
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस मामले में अपना बयान जारी किया है. रघुवर दास ने कहा है कि सरयू राय की किताब मैनहर्ट पर आई है, जिसमें मेरे नाम का उल्लेख है. ऐसी स्थिति में झारखंड की जनता को सच जानने का अधिकार है. यह एक ऐसा मामला है, जिसे विधायक सरयू राय समय-समय पर उठाकर चर्चा में बने रहना चाहते हैं. उन्होंने पहले भी कई बार इस मुद्दे को उठाया है. जनता यह जानना चाहेगी कि आखिर बार-बार मैनहर्ट का मुद्दा उठाकर राय जी क्या बताना चाहते हैं? जिस मैनहर्ट पर यह किताब है, वह मामला बहुत पुराना है. इसकी जांच भी हो चुकी है. सचिव ने जांच की, मुख्य सचिव ने जांच की, कैबिनेट में यह मामला गया. भारत सरकार के पास मामला गया. वहां से स्वीकृति मिली. कोर्ट के आदेश के बाद भुगतान किया गया तो क्या कोर्ट के आदेश को भी नहीं मानते हैं राय जी. रघुवर दास ने कहा कि क्या यह माना जाए कि सरकार से लेकर न्यायालय के आदेश तक, जो भी निर्णय हुए वह सब गलत थे और सरयू राय जी ही सही हैं. यदि उन्हें लगा कि कोर्ट का आदेश सही नहीं था तो वे अपील में क्यों नहीं गये? कोर्ट नहीं जाकर अब किताब लिख रहे हैं. यहां गौर करने की बात यह है कि जिस समय भारत सरकार ने इसे स्वीकृति दी, उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी और झारखंड में अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में भाजपा-झामुमो गठबंधन की सरकार थी. जिस समय कोर्ट के आदेश पर भुगतान हुआ उस समय न तो मैं मुख्यमंत्री था और ना ही मंत्री. जब मैं नगर विकास मंत्री था, उस समय मैनहर्ट के मामले में मैंने कमेटी बनवाई थी. उसके बाद की सरकारों ने इस पर फैसला लिया, तो मैं इसमें कहां आता हूं? सच यह है कि राय जी मेरी छवि धूमिल करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते हैं. यह किताब भी मेरी छवि खराब करने की नीयत से लिखी गई है.
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